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Bioscope

13June2026

चंद्रवदना

अपहृत सुंदरी 'चन्द्रवदना' को दुश्मनों के चंगुल से बचाकर मगध तक सुरक्षित पहुँचाने का बीड़ा उठाता है विद्वान चारुदत्त। गुप्तकाल की पृष्ठभूमि पर आधारित यह कथा मालव राज्य के भयानक खतरों, अदम्य साहस और प्रेम की एक रोमांचक यात्रा है। पढ़ें यह दिलचस्प ऐतिहासिक उपन्यास!

By Shashi Khare2 min read

चन्द्रवदना  , राजकुमार कोरी  का अनेक  नवीन बातों  के साथ नवीनतम  उपन्यास है ।
उपन्यास की कालवधि  गुप्तकाल की है। यह ऐतिहासिक तो है किन्तु  कथावस्तु  काल्पनिक है।
इस अर्थ में भी यह नवीन है ।
हिन्दी उपन्यास की अनवरत यात्रा में  बहुत वैभिन्य और बहुत विस्तार के बाद कुछ शैलियां सफ़र से अलग -सी हो गई है।
उपन्यास में भी प्रयोगवादिता,नवीनता के नारे के साथ भाषा, कथ्य और शैली के परिवर्तन बहुत सकारात्मक परिणाम सामने नहीं लाये हैं ।पाठकों का स्थान रिक्त सा हो गया है।
एक समय था जब  देवकीनंदन खत्री के उपन्यासों के चुंबकीय आकर्षण  ने,हजारों अहिन्दीभाषियों को,उपन्यासों  को  पढ़ने के औत्सुक्य ने हिंदी सिखाई । भाषा विज्ञान में  जब भी हिंदी भाषा के इतने विकास की बात होती है उसमें इन उपन्यासों को श्रेय दिया जाता है।
इतनी सामर्थ्य होती है एक सशक्त  रोचक सृजन में।
अब इस बात पर  निराशाजनक स्वर सुनाई देता है कि पाठक लुप्त हो गए हैं , हिंदी की सभी विधाओं में .स्थिति यह है कि पहले जब प्रकाशक आग्रह किया करते थे लेखकों से,अब लेखकों को  प्रकाशकों से आग्रह करना पड़ता है।
तो लेखन की धारा में बदलाव की आवश्यकता है।
चन्द्रवदना में यही बदलाव दिखाई दिया है।
चित्ताकर्षक चित्र से सुसज्जित मुखपृष्ठ  उपन्यास के कलेवर से भलीभांति परिचित करवाता है ।
रचना प्रक्रिया की संक्षिप्त परिचयात्मक भूमिका के बाद शब्दावली और पात्र -परिचय देना, पाठक के लिए सुविधा जनक है ही , पुस्तक को एक भूली बिसरी शैली में पहुंचाकर सुखद हैरानी का अनुभव करवाता है।

कथा नायक की  गुरुकुल में साथ पढ़े मित्रों से  अचानक भेंट फिर उनको आपबीती सुनाने के
रूप में ,यह आत्मकथ्यात्मक  शैली में  बुना गया कथानक है।
लगातार यात्राओं से आगे बढ़ते घटनाक्रम  से संपूर्ण उपन्यास एक
रोमांचक यात्रा जैसा अनुभूत होता है।
कथानायक  चारुदत्त संस्कृत साहित्य की परंपरागत छवि वाला, सर्वगुण संपन्न, धीरोदात्त , अति विद्वान,राजभक्त और मानवीय मूल्यों के प्रति समर्पित  युवक  है. उपन्यास में जितने भी पात्र आए हैं कुछ को छोड़कर सभी आदर्शवादी हैं । संस्कृति की श्रेष्ठ परंपराओं के वाहक हैं।
इसी प्रकार  चन्द्रवदना  मुख्य नायिका , नाम को सार्थक करती हुई  अनिंद्य सुन्दरी होने के साथ
सात्विक व तेजोमय  छवि की मल्लिका है, विदुषी है, दूरदर्शी है।
ईश्वर के  प्रति अटूट भक्ति भाव रखती है ।
चारुदत्त  धार्मिक अनुष्ठान करवाने दशपुर  पहुंचे तो वहां उन्हें सुलक्षणा गणिका ने  अपहृत  चन्द्रवदना को पुनः उसके घर  मगध राज्य भेजने का काम सौंपा।
चारुदत्त  चन्द्रवदना को लेकर  मालवराज्य की पकड़ से दूर  खतरों से  निपटते  मगध राज्य
कैसे पहुंचें  साथ  ही महाराज  को विद्वता  व साहस  से परिचित करवाना व अमात्य के पद पर पहुंचना --यह पूरी कहानी है।

अंत  में  चन्द्रवदना का  विवाह चारुदत्त से होता है ।
सुखद अंत पाठक को भी  हर्षित करता है।