My Sentiments Studio

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Bioscope

Pages and remembrances from the author's own life.

चमगादड़ की शव यात्रा

बिना बिजली की रात और 'ड्रेकुला' का खौफ! अचानक खिड़की से टकराई एक काली पोटली ने पुरानी यादों को डरावने सच में बदल दिया। फिर छोटीबाई ने कहा—"चमगादड़ की शवयात्रा निकलेगी तभी आज सूरज निकलेगा!" डर और रहस्य से बुना यह संस्मरण जरूर पढ़ें।

बेटी

"क्या मैं काली या बेनूर, या बेटी होने से दूर?" जब उदास मिट्टी ने माँ धरती से अपना मोल पूछा, तो धरती का उत्तर हर हृदय को छू लेने वाला था। चमकते हीरे-मोतियों और साधारण मिट्टी (बेटी) के बीच यह मर्मस्पर्शी संवाद हर बेटी के वास्तविक और अनमोल महत्व को दर्शाता है।

ताजी ताजी लड़ाई

बाई के न आने से लगा कपड़ों का ढेर और ऊपर से पतिदेव की फरमाइश! जब चूल्हे-चौके की झल्लाहट शायरी और मज़ेदार तानों में बदल जाए, तो घर का अखाड़ा कैसा होता है? पढ़िए पति-पत्नी की इस दिलचस्प और गुदगुदाने वाली 'ताजी ताजी लड़ाई' को।

विद्या

साठ के दशक में पढ़ाई के लिए बावड़ी में डूबने वाली विद्या, सत्तर के दशक में दहेज की आग में जल गई। आज वह आत्मनिर्भर है, पर क्या पितृसत्ता से उसकी जंग खत्म हुई? जन्म-दर-जन्म स्त्री के अनवरत संघर्ष को बयां करती यह मार्मिक कविता पढ़ें।

मोहना

मशीन सी दौड़ती जिंदगी में जब मोहना पुताई वाले को बुलाती है, तो पति का दर्द छलक उठता है—'हमसे तो दिहाड़ी मज़दूर अच्छे हैं!' क्या सच में सफेदपोश नौकरीपेशा लोग सड़क किनारे बैठे मज़दूरों से भी गए-गुज़रे हैं? मिडिल-क्लास की कड़वी सच्चाई दिखाती मार्मिक कहानी—'मज़दूर'।

अलविदा २०२२

2022 को अलविदा! बनारस की उस अनजान रात में जब अचानक फोन बंद हुआ, तो लगा जैसे इस 'मुक्ति धाम' में हमेशा के लिए खो जाने का ईश्वरीय संकेत हो। पुरानी सहेली से मुलाकात, बेटे से मजेदार शर्त और जीवन के खट्टे-मीठे अनुभवों से भरी यह दिलचस्प डायरी आपके भी पुराने तार छेड़ देगी।

माटी का घड़ा

मिट्टी का घड़ा और इंसान—दोनों में क्या समानता है? वैशाख पूर्णिमा पर कुम्हार के चाक से उतरी यह कहानी सिर्फ एक बर्तन की नहीं, बल्कि मानव स्वभाव की जिद्द, नाजुकपन और हड़प्पा काल तक फैले इतिहास की दास्तान है। जीवन के इस गहरे दर्शन को जानने के लिए पढ़ें!

लाहुल

बर्फ से ढकी लाहुल घाटी छह महीने तक दुनिया से कटी क्यों रहती है? एक ऐसी रहस्यमयी जगह जहाँ दुखी होकर मंत्र पढ़ने से बेहतर खुश होकर गीत गाना है! डॉ. तुलसी रमण की पुस्तक 'लाहुल' हिमालय के इसी अनछुए लोक, देव-कथाओं और प्रकृति के रोमांचक रहस्यों का अद्भुत दस्तावेज है।

जागरण

मोटे और सांवले शरीर से परेशान श्यामसुंदर को जब मनचाहा सुंदर रूप चुनने का जादुई मौका मिला, तो उसने कई आकर्षक चेहरे आजमाए। लेकिन क्या एक खूबसूरत चेहरा उसकी असली पहचान बन सका? आत्मा और शरीर की कशमकश को दर्शाती यह रहस्यमयी कहानी आपका दिल छू लेगी।

आत्मीय मुलाक़ातों के संग , संगमरमर पर गीतों के रंग

जबलपुर की संगमरमरी वादियों और खुले आसमान तले सजी एक जादुई काव्य गोष्ठी! जहाँ गीतों के रंग थे, प्रेम के मधुर छंद थे और जीवन की कड़वी सच्चाइयों का अक्स भी। एक ऐसी शाम जहाँ शब्द मौन हो गए और भावनाएँ गूँज उठीं। पढ़िए इस सुरीली और भावपूर्ण साहित्यिक शाम का आँखों देखा हाल।

चंद्रवदना

अपहृत सुंदरी 'चन्द्रवदना' को दुश्मनों के चंगुल से बचाकर मगध तक सुरक्षित पहुँचाने का बीड़ा उठाता है विद्वान चारुदत्त। गुप्तकाल की पृष्ठभूमि पर आधारित यह कथा मालव राज्य के भयानक खतरों, अदम्य साहस और प्रेम की एक रोमांचक यात्रा है। पढ़ें यह दिलचस्प ऐतिहासिक उपन्यास!

डार्क हॉर्स

112 पन्नों की भदेस भाषा और खीझ से शुरू हुआ सफर क्या अंत में सुकून दे सकता है? 'डार्क हार्स' सचमुच एक छुपा रुस्तम है, जिसके अंतिम 25 पन्ने पूरी कहानी पलट देते हैं। जानिए कैसे यह उपन्यास अंत में बेहतरीन बनकर पाठक को चौंका देता है। पढ़ें यह दिलचस्प समीक्षा!

व्योमकेश दरवेश

क्या महान साहित्यकार आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी भी ईर्ष्या और षड्यंत्रों के शिकार हुए थे? विश्वनाथ त्रिपाठी रचित 'व्योमकेश दरवेश' उनके अनछुए जीवन, संघर्षों और गुरु-शिष्य के अद्भुत रिश्ते का मार्मिक दस्तावेज़ है। साहित्य प्रेमियों के लिए एक अनिवार्य पाठ!

पीले फूल कनेर

क्या आधुनिक कहानियों से 'किस्सागोई' की मिठास खो गई है? शशि खरे का संग्रह "पीले फूल कनेर" इसी खोती परंपरा को पुनर्जीवित करता है। स्त्री-विमर्श, पर्यावरण और लोक-कथाओं से बुनी इन 21 मार्मिक कहानियों की शानदार समीक्षा पढ़ें और साहित्य की दुनिया में खो जाएँ!

ये

जब एक साधारण से सर्वनाम 'ये' में पूरा संसार सिमट जाए! "आज मेरे ये गाड़ी से गिर गए"—सहेली के इस एक वाक्य ने व्याकरण के नीरस सर्वनाम को पत्नी के गहरे प्रेम, एकाधिकार और भारतीय संस्कृति की मिठास में बदल दिया। शब्दों की गहराई नापती यह कहानी जरूर पढ़ें।

लघु कथा

गाँव की रक्षा को निकलीं काली माई! आस्था के नाम पर टेकरी पर चढ़ावा चढ़ा, जिसे बड़े-बुजुर्गों ने पाप के डर से वहीं छोड़ दिया। लेकिन तभी कुछ बिगड़ैल लड़कों ने उसी चढ़ावे की मिठाई और पैसों पर हाथ साफ कर दिया। आस्था और दुस्साहस की यह दिलचस्प कहानी जरूर पढ़ें!

कभी कभी यूँ.....

शाम के धुंधलके में छत पर अचानक एक सुनहरे पंखों वाले शानदार उल्लू से मेरा सामना हो गया! उसकी अफ़सर जैसी अकड़ और घूरने वाली नज़रों ने मेरी साँसें रोक दीं। क्या वह सचमुच लक्ष्मी जी का वाहन था? पढ़िए डर, आश्चर्य और एक मज़ेदार अंत से भरा यह रोचक किस्सा!

यात्रा वृतांत

अंधेरी रात, घनघोर जंगल और एक खराब गाड़ी! चिल्पी घाटी के खतरनाक मोड़ों पर फंसी यह यात्रा सिर्फ एक सफ़र नहीं, बल्कि जीवन और माया के रहस्यों को जानने की एक गहरी खोज बन जाती है। पढ़िए यह रोमांचक सड़क यात्रा वृत्तांत जो आपको अपनी ही ज़ुल्फ़ों में उलझा लेगा।

राई . . लोकनृत्य

अठारहवें जन्मदिन पर गाँव की अपनी पहली यात्रा में, मुझे लोक कलाओं के रंग देखने को मिले। लेकिन राई नृत्य के बीच मिली पूनम की दुखद कहानी ने मेरे मन पर गहरा असर किया। एक भागने की कोशिश, एक दर्दनाक अंत। जानिए कैसे एक लोक कला मेरे लिए हमेशा के लिए त्रासदी बन गई।

स्मृतियाँ झाबुआ की

बचपन की निश्छल यादों, भील संस्कृति के सौंदर्य और अधूरी प्रेम कहानियों में सिमटा एक शहर—झाबुआ। लेकिन क्या सालों बाद भी वहाँ सब वैसा ही होगा? स्नेहलता के आंसू और खाटवे का वह टंगा रह गया झोला आज किस राज को छुपाए हैं? जानने के लिए पढ़िए यादों और रहस्यों से बुनी यह खूबसूरत कहानी।

याद बचपन की

छह वर्ष की उम्र में सड़क पर मिला एक बिना शीशे का चश्मा... क्या इसका बनारस के मंदिर में भगवान के सामने खाली हाथ खड़े होने से कोई गहरा नाता हो सकता है? माँ की वो हँसी और मन में उठी हीनभावना... पढ़िए मासूमियत और आत्ममंथन से जुड़ी यह बेहद खूबसूरत कहानी!