लघु कथा
गाँव की रक्षा को निकलीं काली माई! आस्था के नाम पर टेकरी पर चढ़ावा चढ़ा, जिसे बड़े-बुजुर्गों ने पाप के डर से वहीं छोड़ दिया। लेकिन तभी कुछ बिगड़ैल लड़कों ने उसी चढ़ावे की मिठाई और पैसों पर हाथ साफ कर दिया। आस्था और दुस्साहस की यह दिलचस्प कहानी जरूर पढ़ें!
-----ग्राम देवी का संसार---
शारदीय नवरात्रि की दशमी तिथि है । वर्ष में दो बार गाँव की अधिष्ठात्री देवी को पूजा देना होती है ।
गाँव 'बड़ा मलहरा 'में छह-सात लड़के बड़ी जतन से डामर की सड़क बुहार रहे थे । काली माई अपने नाहर समेत निकल रही हैं । भक्तों ने थोड़ा पानी भी छिड़क दिया ।दस बारह लोगों का जुलूस , आगे किशोर और बहुत छोटे पाँच -सात साल के लड़के नगाड़े और ढपली की ढमर-ढमर में जोशीली छलांगें भर रहे थे कुछ खिसकती निकर और बहती नाक से जूझते हुए भी खुशी से नाच रहे थे।
काली माई बने लड़के को कोयला घोंट कर रंगा गया था ।
गोटा लगी काली साड़ी , बड़े भद्दे नायलॉन के काले बाल , जरी चिपका कर बनाया हुआ गत्ते का मुकुट ।
होंठों पर लाल रंग और कागज की लाल जीभ बाहर निकली हुई।
पीठ और छाती की सूखी पसलियों को गेंदे की माला से ढाक दिया गया था । उसका जोश देखते ही बनता था एक हाथ में धुँआ उगलता खप्पर । दूसरे में लकड़ी की लाल कागज चिपकी हुई ...दिल दहलाती तलवार ...। काली माई और पीला नारंगी शेर दोनों मिलकर बड़ी लय में नाच रहे थे । जैसे ही धुआँ कम होता साथ चलने वाले कपूर लोबान आदि डालकर भभका देते ।
पुजारी और कुछ वृद्ध प्रसन्न थे ।धुएँ की ऊपर उठती लकीरों में गाँव के जिन्न , भूत प्रेत , डायन की आकृतियों का अंदाज लगाया जा रहा था ।
नगाड़ा , घण्टा, थाली सबकी तेज टंकार , काली माई के ऊपर उड़ाया जाने वाला गुलाल , सिन्दूर ,अक्षत, फूल सब मिलकर भक्ति, आस्था की पावन भावना को चारों ओर फैला रहे थे।
घरों से निकल कर लोग काली माई की पूजा कर साष्टांग प्रणाम कर रहे थे।
काली माई आवेश में तलवार से मार-काट मचाती अपने गाँव से दैहिक- दैविक -भौतिक तापों को हंकार कर गाँव की सीमा के बाहर छोड़ आयेगी ।
गाँव के बाहर आकर एक टेकरी पर पीपल के नीचे " पूजा दी " गई । सबके जाने के बाद पुजारी ने अपने हिस्से के पैसे और मिठाई उठायी और चला गया। अभी भी वहाँ बहुत कुछ बाकी था ।
दौलतराम और दो वृद्ध रुके थे ।एक ने कहा खूब चढ़ोत्तरी चढ़ी है और बहुतेरी मिठाई । चलो उठा लें ।दौलतमंद ने कहा नहीं , देवी के चर -अचर आते हुइयें उनके लिए है । हमें पाप लगेगा ।
दूसरे ने कहा -दादा ऐइसें तुमारी सरपंची छूट गई है। दौलतराम बोले-चलो सब जादा नईं ठहरने ।
सब के जाने के बाद टीले के पीछे से दो तीन सिर ऊपर उठे । गाँव का बिगड़ैल लड़का बरमा लोदी
अपने दो मित्रों के संग कूदकर इधर आ गया ।दोनों लड़के तो असमंजस में दूर खड़े रहे परन्तु बरमा ने पूजा पर चढ़े पैसे उठाये , जेब में डाले , मिठाई खाई और डरते हुए मित्रों के मुँह में भी ठूंस दी । पूरी मिठाई खाने के बाद तीनों को हँसी आ गई।
