13June2026
ताजी ताजी लड़ाई
बाई के न आने से लगा कपड़ों का ढेर और ऊपर से पतिदेव की फरमाइश! जब चूल्हे-चौके की झल्लाहट शायरी और मज़ेदार तानों में बदल जाए, तो घर का अखाड़ा कैसा होता है? पढ़िए पति-पत्नी की इस दिलचस्प और गुदगुदाने वाली 'ताजी ताजी लड़ाई' को।
ताजी ताजी लड़ाई !
बाई नहीं है आयी , कपड़ों का ढेर है
वो झांक झांक पूछते , खाने में देर है ?
सुबह तो पूड़ी खाई , फिर भूख लग आयी ?
बोगस हुई है लाइफ़ , कैसा अंधेर है ।
...पिएगा बिल्ला मट्ठा , रबड़ी के फेर में ?
क्या शेर घास खाये , बकरी की खैर में ?
.....ताने सुनाने में नहीं ज़रा देर है
जो बाज समझे खुद को पूरा बटेर है ।।
....मैं बाज या बटेर , तुम ज़हर सवा सेर ।
अब अपनी ये लड़ाई एलान-ऐ -अदावत है ।।
कब मिलेगा क़ाफ़िया, कहाँ ज़बर-ज़ेर है
गिरस्ती के बोझ में दबे सारे शेर है ।।
