My Sentiments Studio
Tell TalesDiary

बारिश

आसमान में छाए काले बादल, कागज़ की नावें और बिजली की पाजेब पहने बरसती फुहारें! आषाढ़ के आगमन के साथ प्रकृति को नया जीवन देने वाली बारिश आ गई है। मानसून की अठखेलियों और उसकी खूबसूरती का जश्न मनाती यह मनमोहक रचना आपको भी बारिश की बूंदों से प्यार करने पर मजबूर कर देगी!

By Neelam Verma2 min read

बारिश ......स्वागत तुम्हारा  !

बारिश ...... इस शब्द में ही बूंदों की छम-छम सुनाई पड़ती है ! आषाढ़ के पहले बादल ने कर ली है बूंदों की अगवानी , अब तो सावन-भादो तक होगी , इनकी ही मनमानी !

हवाओं ने ,पीट –पीट कर बना डाला है काले बादलों का फोया . उनके पीछे छुपा दिए गए सूर्य देव , रूठ गए हैं.

जैसे कोई दे अचानक ही दरवाज़े पर दस्तक , ऐसे ही छत पीटती आई है बारिश ! बिजली की पाजेब पहने , सावन का संगीत सुनाती , अब वह चुप कहाँ रहने वाली है  ? ढूँढ रही है वो खिड़की , जो खुली छूट गयी हो . और फिर अन्दर आकर हर चीज़ सीली कर जाएगी . तब देना उसे सजा !

प्रकृति को नव-जीवन देती , हमें भी तो जीवनसिक्त करती है. सोये पड़े नन्हें बीज , बूंदों का दुलार पा , जाग उठे है , बस अब अंगड़ाई लेकर , बाहें फैलाये , बाहर आ निकालेंगे . हमारे अन्नदाता , हमारे किसानों की कितनी कितनी मिन्नतों के बाद आई है ये बूंदे ! अब वे कजली गाते हुए , नए बीज रोपेंगे . 

बारिश की इन बूंदों  को तो , सबसे ज्यादा पसंद है ये नन्हें बच्चे , जो अपनी माँ की बात अनसुनी कर , बाहर पानी में छपकते , कागज़ की नाव तैराते खिलखिला रहे है. बूंदों को पसंद है इनकी किलकारियां , तभी तो उनके गुलाबी गालों पर गुदगुदी किये जा रही है ! इन नन्हों की शैतानी से सीख ले कर , हवाओं के साथ  सांठ गांठ कर ली है इन बूंदों ने . अब, जल्दी-जल्दी घर की ओर भागते लोगों के छाते उलटने वाली है ये ! फिर ठहाके लगाकर हँसेगी , हवायें और ये बूंदे ! 

कवियों के मन मे आ रहे है सुन्दर ख्याल , जो शब्द बन कर ढल जायेगे , कविताओं में ! जब बारिश हमसे विदा ले लेगी , तब , हम इन कविताओं में ढूंढेंगे, बारिश की बूंदों को ............
पर अभी तो , इन्द्रधनुष का हार पहने , ये हमारा मन मोह रही है ! रात, चाँद को काले बादलों का घूँघट पहना और उतार रही है ! अभी तो बस मन मयूर हुआ जा रहा है ......

बारिश ....... स्वागत तुम्हारा  !

बहुत बहुत स्वागत !   

Comments(0)

No comments yet — be the first.