खिचड़ी
स्वादिष्ट खिचड़ी खाकर सीधे-सादे भोला ने उसका नाम रटना शुरू किया। लेकिन रास्ते में 'खिचड़ी' बन गई 'उड़-चिड़ी'! अब घर आकर भोला पत्नी से 'उड़-चिड़ी' पकाने की ज़िद कर रहा है। क्या भोला की समझदार पत्नी इस पहेली को सुलझा पाएगी? हँसी से भरपूर यह मज़ेदार कहानी ज़रूर पढ़ें!
छोटे से एक गाँव में रहता था भोला . अपने नाम जैसा ही भोला- भाला , सीधा-साधा था वह ! भोला एक दिन अपने दोस्त से मिलने गया . दोनों ने खूब गप-शप की और खायी गर्मागर्म खिचड़ी , खूब सारा घी डालकर. भोला को खिचड़ी एकदम भा गई . उसने अपने दोस्त से पूछा - इसे बनाते कैसे हैं ?
अरे , ये तो बहुत आसान है - दोस्त ने कहा .
चांवल लो ज़्यादा , और लो थोड़ी दाल
डालो नमक ,हल्दी और पानी
पका कर खाओ बढ़िया माल !
घर लौटते समय भोला रटता जाता था - खिचड़ी …खिचड़ी…खिचड़ी , ताकि भूल ना जाए की खाया क्या था. रास्ते मैं एक बूढ़ा आदमी चिड़ियों को दाना चुगा रहा था . भोला को खिचड़ी … खिचड़ी कहते सुना तो वो हँस कर बोला - अरे खिचड़ी .. खिचड़ी नहीं भोला , कहो खा-चिड़ी…खा-चिड़ी ! मैं इन नन्हीं चिड़ियों को रोज़ दाना खिलाता हूँ.
भोला तो था ही भोला , खिचड़ी भूलकर रटने लगा- खा-चिड़ी…खा-चिड़ी .
चलते चलते वह एक खेत में पहुँचा. बाजरे की फसल लहलहा रही थी . किसान उन चिड़ियों को उड़ा रहा था जो बाजरे के दाने खाने आ रही थीं . भोला वहाँ से ज़ोर- ज़ोर से कहता हुआ निकला- खा-चिड़ी… खा-चिड़ी…खा-चिड़ी ! किसान को बहुत ग़ुस्सा आया , उसने भोला को अपना मोटा सा डंडा दिखाया और चिल्ला कर कहा - कहो उड़- चिड़ी…उड़-चिड़ी…उड़-चिड़ी. भोला डर गया और तुरंत रटने लगा - उड़ चिड़ी..उड़ चिड़ी…उड़ चिड़ी….उड़ चिड़ी…
यही रटते रटते भोला घर पहुँचा और अपनी घरवाली से बोला - सुनो , आज तो तुम खाने में “उड़- चिड़ी “ बनाओ. वाह , क्या मज़े की चीज़ होती है !
घरवाली हैरान ! भला खाने की ऐसी भी कोई चीज़ होती है ? थोड़ी देर सोच के बोली - “ उड़- चिड़ी नाम की कोई खाने की चीज़ होती ही नहीं है . भोला नाराज़ हो गया और मुँह फुला कर बोला - तुम्हें कुछ आता भी है ?
घरवाली थी समझदार , उसने भोला से पूछा - अच्छा बताओ उड़- चिड़ी में क्या क्या डला था ?
भोला तुनक कर बोला - वाह ! मुझे क्या अपने जैसा बुद्धू समझा है ? मुझे पता है कैसी होती है उड़-चिड़ी .
चांवल लो ज़्यादा
थोड़ी मिलाओ दाल
फिर डालो नमक,हल्दी और पानी
पका कर खाओ तर माल !
और हाँ , घी बहुत सारा डालना.
घरवाली मुस्कुरायी और थोड़ी देर में खिचड़ी पका लायी. भोला को थाली मैं परोस कर कहा - लो , जी भर कर खाओ खिचड़ी !
अरे हाँ , खिचड़ी …खिचड़ी ! यही तो कह रहा था मैं !! - भोला ख़ुशी से उछल पड़ा .
हाँ , मैं ही नहीं समझी थी , बुद्धू जो हूँ - भोला की घरवाली खिलखिला कर हँस पड़ी .
फिर दोनों ने मिलकर ख़ूब खायी खिचड़ी .
