भानू की भिंडी
हरी सब्ज़ियों को 'घास-फूस' कहकर मुँह बनाने वाले भानू की बस एक ही ज़िद है—सिर्फ़ भिंडी और पूड़ी! माँ ने भी ठान लिया है कि अब उसे रोज़ सिर्फ़ यही मिलेगा। पर क्या भानू हमेशा अपनी मनपसंद भिंडी-पूड़ी खा पाएगा? बच्चों के नखरों की यह मज़ेदार कहानी ज़रूर पढ़ें!
माँ..अ…अ….अ…आ !!! - भानू की रोनी आवाज़ का माँ इंतज़ार ही कर रहीं थीं .
मैं नहीं खाऊँगा !!! - भानू ने नाराज़गी से माँ को देखते हुए कहा - मैं घास-फूस नहीं खाता .
भानू हरी सब्ज़ियाँ तुम्हारे लिए अच्छी हैं , ज़रूरी हैं - माँ ने उसे समझाने की कोशिश की .
भानु ने ग़ुस्से से उन्हें देखते हुए फिर कहा - मैं घास - फूस नहीं खाता !
लेकिन हरी सब्ज़ियाँ बहुत फ़ायदे की होती हैं - माँ ने फिर समझाया.
माँ , भिंडी भी तो हरी होती है , वह क्यों नहीं देतीं और मैं रोटी नहीं पूड़ी खाता हूँ .
भिंडी तो कल भी खायी थी तुमने भानू , रोज़ रोज़ एक ही चीज़ कैसे खा सकते हो तुम ? - पापा ने परेशान हो कर कहा .
खा सकता हूँ - भानू ने ज़िद्द करते हुए कहा .
तो ठीक है - माँ ने उसकी प्लेट से पालक हटाते हुए कहा - कल से तुम्हें सिर्फ़ भिंडी पूड़ी ही मिलेगी . हमेशा !
भानू ने ध्यान से उनकी तरफ़ देखा . ना , वे नाराज़ तो बिलकुल नहीं थीं , वे तो मुस्कुरा रहीं थीं .
सच कह रहीं हैं माँ ? - भानू ने किलकते हुए पूछा .
एकदम सच ! - माँ ने जवाब दिया .
अगले दिन जब भानू स्कूल से वापस आया तो घर में भिंडी पूड़ी की सोंधी ख़ुशबू फैली हुई थी . उसने अपना बस्ता पटका ,हाथ धोये और तुरंत टेबल पर बैठ गया .
अरे ! कपड़े तो बदलो बेटा -माँ के कहा .
बाद में !! - और भानू पूड़ी भिंडी पर टूट पड़ा .
भानू को यक़ीन तो नहीं था पर रात के खाने में भी उसे भिंडी पूड़ी ही मिली .
मज़ा आ गया ! - भानू ने ख़ुशी ख़ुशी खाना खाते हुए कहा .
अगले दिन भी भानू गाना गाते हुए खाना खा रहा था - अरे …मज़ा है भिंडी और सज़ा है बैंगन …..
भानू की बहन बैंगन का भुर्ता खा रही थी .
आगे के तीन दिन भानू की ज़िंदगी के बेहतरीन दिन थे. उसे खाने में दोनों वक्त सिर्फ़ भिंडी पूड़ी ही मिले . किसी ने भी उसे कुछ और खाने को कहा तक नहीं .
पाँचवे दिन स्कूल से लौट कर भानू ने बैग रखते हुए पूछा - आज खाने में क्या है ?
वही तुम्हारी मनपसंद पूरी और भिंडी - माँ ने मुस्कुराते हुए कहा । चलो जल्दी से हाथ धो कर आ जाओ , कपड़े तो बाद में ही बदलोगे ना ?
नहीं , कपड़े बदल लेता हूँ - भानू ने थोड़े अनमने तरीक़े से कहा.
ना जाने क्यों आज उसे भिंडी का नाम सुनकर उतनी ख़ुशी नहीं हुई .
भानू पूड़ी ठीक तरीक़े से खाओ ,उसे कुतर क्यों रहे हो ? और ये भिंडी अभी तक वैसी ही रखी है , और नहीं चाहिए ? माँ ने पूछा और मुस्कुराते हुए पापा की तरफ़ देखा .आज भानू की खाना खाने की रफ़्तार बहुत धीमी थी . भानू को माँ की बात याद आयी - ‘ अब तुम्हें सिर्फ़ पूड़ी भिंडी ही खाने को मिलेगी , हमेशा .’ ऐसा सुनकर उसे कितनी ख़ुशी हुई थी ,लेकिन आज पाँच ही दिन तो
