इचक,बीचक , दाना.
घोंसले में रहने वाले तीन तोतों में 'दाना' सबसे ज़िद्दी था। बिना उड़ना सीखे जब उसने घोंसले से छलांग लगाई, तो सीधे तेज़ नदी में जा गिरा! अब पानी में डूबते दाना को कौन बचाएगा—कोई भली बतख या खतरनाक मगरमच्छ? नन्हे तोते की इस मज़ेदार कहानी को ज़रूर पढ़ें!
एक था पहाड़ , बहुत ऊँचा बड़ा ही मज़बूत. उस पर उगा था एक पेड़ , बड़ा ख़ुशदिल हमेशा हवा में झूमता रहता . नीचे कल कल करती नादिया बहती थी .
उस पेड़ पर था एक घोंसला . उसमें रहते थे तोता , तोती और उनके तीन बच्चे . ईचक, बीचक और दाना .
ईचक बड़ा ही प्यारा बच्चा था , तोता तोती की हर बात मान लेता था . बीचक थोड़ा शैतान था . और दाना ? दाना तो पूरा बिगड़ा बच्चा था . जो बात मना करो ठीक वही करता था . तोती खाना लाती और दाना सबके हिस्से का खा जाता. अभी तुम्हारी बारी नहीं थी ना दाना - माँ समझती . दाना कहता - पर मैं भूखा हूँ ना !
जब ईचक , बीचक़ और दाना थोड़े बड़े हुए तो उन्हें घोंसले से बाहर जाने का मन हुआ .
माँ ने समझाया - तुम्हारे पंख अभी मज़बूत नहीं है . थोड़ा इंतज़ार करो . ईचक तुरंत समझ गया . बीचक को थोड़ी देर में समझ आया , पर वो भी समझ गया . लेकिन दाना ? वो तो बिलकुल ही नहीं समझा . उसे ना सुनना था , ना ही समझना .
एक दिन जब तोता तोती खाना ढूँढने गए तो दाना ने अपने पर फैलाए उछल कर बाहर जाने की कोशिश करने लगा . अरे अरे नहीं नहीं नहीं ....... ईचक, बीचक चिल्लाये . पर दाना को सुनना ही कब था , वो तो घोंसले के बाहर ये चला , बस उड़ चला !
अह्हाहाहाहाहा ..........कितना मज़ा आ रहा है - दाना गुनगुनाया . हवायें उसे कभी ऊपर कभी नीचे झुला रही थी . दाना आँखें बंद करके अपने नन्हें नन्हें पर हिला रहा था . लेकिन दाना को उड़ना आता ही कहाँ था , सो वो तेज़ी से नीचे की तरफ़ गिरने लगा . दाना की आँखें खुली और वो चिल्लाया - माँssssssss !!!
और इसके साथ ही आवाज़ आयी - “ छपाक “ !!!!!
हाँssssss दाना नीचे नदी में जा गिरा था . और अब , पानी उसे बहाए लिए जा रहा था . ना उसके पंख काम आ रहे थे ना पैर . और नदी का पानी , उफ़्फ़्फ़्फ कितना ठंडा था. दाना को छींकें आ रही थी - आक्छीं आक्छीं आक्छीं !
आँखों, नाक और कान में पानी घुस गया था . माँssssss- अब दाना रोया.
अचानक दाना को लगा वो किसी नरम गुदगुदी चीज़ पर बैठा है . उसने आँखें खोली , देखा कि वह तो किसी सफ़ेद पक्षी पर बैठा है !!
क्वैक क्वैक क्वैक - उस बतख़ ने कहा , जिसपर दाना सवार था .
बतख़ कह रही थी - मूर्ख बच्चे , माँ का कहा मानते नहीं तुम ?
बतख़ ने दाना को नदी के किनारे पटका और मटकती हुई वापस नदी में वापस चली गयी.
तोता तोती किनारे पर उसका इंतेज़ार कर रहे थे . तोती ने दाना को तुरंत अपने बड़े बड़े परों में छुपा लिया.
माँsssssss - दाना और रोया .
सोचो अगर बतख़ के बदले मगरमच्छ मिल जाता तुम्हें तो ? - तोती ने कहा .
दाना को अब एक बार में बात समझ आ गयी .
वह बहुत शर्मिन्दा हुआ और उसने तय कर लिया की वो अपनी माँ की हर बात मानेगा. अच्छा बच्चा बन जाएगा.
