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सरप्राइज़

अनुशासित जीवन जीने वाली अंतरा का जन्मदिन तब हंगामे में बदल गया, जब उसकी नटखट ननद मान्या ने एक 'सरप्राइज पार्टी' दे दी! कटे हुए पर्दे, बिखरा घर और पिज़्ज़ा-बर्गर की इस अजीब दावत में क्या परफेक्शनिस्ट अंतरा खुश हो पाएगी? रिश्तों की गर्माहट से बुनी एक बेहद प्यारी कहानी।

By Neelam Verma13 min read

शिव वंदना की आवाज़ से अंतरा की आँखें खुलीं ............ हर सुबह की तरह !
मनु घर में सबसे पहले उठते हैं , फिर वातावरण को ऊर्जामय बनाने और बाकी सब को जगाने के लिए भक्ति संगीत लगा देते हैं. बाकी सब यानी बिटिया कुहू और ननद मान्या . अब यह बात और है की , कुहू और मान्या को , न तो अल सुबह जागना पसंद है और न ही भक्ति संगीत !
अंतरा ने खिड़की से बाहर देखा और एक गहरी सांस ली . सुबह की तरो-ताज़ा हवा, वह भी बारिशों की .............. न जाने कितने फूलों , पत्तियों और गीली मिट्टी की सोंधी ख़ुश्बुओं से सराबोर ! ऐसा परफ्यूम तो बस प्रकृति ही रच सकती है . हलकी झड़ी के पार , दूर दूर तक फैली हरियाली , जैसे उपर वाले ने हलके गहरे हरे रंगों में अपनी कूची डूबो कर , बस यूँ ही छिटक दी हो .
कितना सुन्दर दिन है .......................

मनु चाय ले आये हैं, और गीले अखबार से सूखी खबरें समेटने में तल्लीन हैं. अंतरा ने आंख के कोने से ट्रे का जायज़ा लिया और फिर नज़रें मनु पर टिका दी . 
“ हूँ ?” – मनु ने अखबार से नज़रें उठाये बिना , उसका अबोला प्रश्न महसूस लिया था. धीर , गंभीर , संवेदनशील और हमेशा निर्वीकार से नजर आते मनु !

“ कुछ नहीं “ – अंतरा ने कहा और पैर ज़मीन पर टिका दिए . रात सपना ...बीत गयी , और अब दिन सामने था. पर आज अंतरा को लगा था की शायद मनु , ट्रे पर एक छोटा सा फूल रख लायें , अपने ही बगीचे से तोड़ा हुआ !

कुछ देर बाद , ऑफिस जाते जाते  मनु उसकी ओर मुड़े और कहा – “ तुम्हें रजत पर ईयरनिंग्स पसंद आये थे ना ? तुम ले आना , ऑफिस पहुँच कर गाडी वापस भेजता हूँ . पेमेंट में शाम को करता आऊँगा. 

“ हैप्पी बर्थडे “ कहने का यह स्टाइल , अंतरा को हमेशा अजीब लगता है . और मनु के छोटे से गाँव वाले घर में , जन्मदिन मनाने का तरीका पारम्परिक है. माथे पर टीका , आरती , आटे-गुड़ के गुलगुले और सिर पर आँचल रख कर आशीवाद देती माँ ! सीधा , सरल और अभिभूत कर देने वाला !

शायद , अंतरा के घर का तरीका , मनु को अजीब लगता होगा . ठीक बारह बजते ही , अंतरा के छोटे भाइयों का , अंतरा के चेहरे पर केक मल देना , गुब्बारे फोड़ना . गिफ्ट्स , कार्ड्स , खाने-पीने का जो सिलसिला शुरू होता तो अगली  रात बारह बजे ही खत्म होता.
“ शाम को बाहर चलेंगे , तुम जहाँ कहो वहाँ , और जिन लोगों को बुलाना है , मुझे बता देना , मैं उन्हें फ़ोन कर लूँगा “ – मनु कह रहे थे. हमेशा ऐसा ही होता है . 
थैंक्स कहूँ क्या ? – अंतरा सोच रही थी .

अंतरा ने मनु को शुरू में , अपने अंदाज़ में ढालना चाहा था.  एक दिन वे गंभीरता से बोले थे –“ अंतरा , अगर हम ही संयत नहीं रहेंगे तो मान्या , कुहू को कैसे सँभालेंगे ?”
और अंतरा समझ गयी थी . 
माँ , मान्या की जल्दी शादी कर देने के पक्ष में थीं . मनु ही उसे यहाँ आगे पढ़ाने ले आये थे , माँ को विश्वास दिला कर की उसका वे पूरा ध्यान रखेंगें .

मनु के जाते ही , अंतरा एक कप कॉफ़ी लेकर बाल्कनी में जा पहुँची . बहुत पसंद है उसे ये मौसम ! प्रकृति को नव-जीवन देता , यह अंतरा को भी जीवनसिक्त कर जाता है .

“ हैप्पी बर्थडे भाभी !!!!!! “ –मान्या उसके गले मे झूल गयी . बारिश की बूंदों की आवाज़ जितनी ही जीवंतता थी मान्या की आवाज़ में ! मान्या अपने भाई से बिलकुल उलट है . लाऊड ! वह चलती नहीं  उछलती फिरती, हँसती नहीं ठहाके लगाती , बोलती नहीं हंगामा करती . उसे टोन-डाउन करने की , अंतरा की सारी कोशिशों के जवाब में , मान्या कहती – “चिल भाभी ! “
“ तो क्या प्रोग्राम है ? Going bhaiya way ?” 
अंतरा हमेशा वही करती जो मनु कहते , इसी बात को मुस्कुरा कर सुनाया जा रहा था.  “अरे कभी तो मन की भी किया करें  भाभी !” – मान्या  की आँखें शैतानी से चमक रही थी .
“ पहले की बात और थी मान्या  “ – अंतरा ने कहा .​
“ हाँ , अब हर चीज़ के पैरामीटर सेट हो गए है . ये करो , ऐसे करो . वो करो ही नही .”
अंतरा ने कुछ कहने के लिए मुह खोला ही था की मान्या  –“ चिल भाभी” कहकर बाल्कनी से घर के अन्दर ! लेकिन अगले ही पल वह फिर बाहर थी –“ भाभी....... चलिए , उठिए ......जाईये !!!!! “
अरे...अरे कहाँ ? क्यों ? – हड़बड़ा कर अंतरा ने पूछा . इस मान्या का तो भरोसा ही नहीं है अब क्या कर आई ???
“ ये मेरी तरफ से आपको गिफ्ट है “ – कुछ कार्ड्स पकड़ते हुए वह बोली . देखा तो , एक अच्छे से स्पा के, नख से शिख तक के सेशंस बुक थे , अंतरा के नाम ! 
तुमने अपनी सारी पॉकेट मनी लुटा दी ? – अंतरा ने हैरानी से पुछा .
“अरे नहीं ! भाई की जेब काटी है ! “ – मान्या ने दांत निकाले .

मान्या ये तो मुश्किल है ! – अंतरा ने सर हिलाया , अभी घर की साफ़ सफाई ..........

.........ये बाई  , वो बाई ........ मान्य ने आँखें नचाई – “ छोडिये भी , मैं हूँ न !“
“ वही तो ! “ – अंतरा ने मन मे सोचा . सारा दिन नेट-सर्फिंग , आर्डर पर पिज़्ज़ा और तेज वेस्टर्न म्यूजिक , बस मान्या और कुहू यही करने वाले है दिनभर . घर तो ऐसा ही तबाह मिलना है.
फिर कुछ सोच कर अंतरा ने तय किया की आज घर पर तो किसी को आना नहीं है , चलकर अपनी ही धुन सुधार ली जाये .

शाम होते होते अंतरा घर लौटी . सच में खुद की पम्पेरिंग करना कितना सुखद है , कभी कभी सिर्फ खुद के बारे में भी सोचना चाहिए . घर में घुसते ही वह हैरान हुई . ड्राइंग रूम तो साफ़ दिख रहा था , जगह जगह फूल सजे थे.    
“ ये फूल ......... “ – अंतरा ने अंदाज़ लगाना शुरू किया .
“ भाई ने भेजे हैं ! “ – चुइंग गम चबाती मान्या बोली . “ मैंने कहा था भेजने को . भाई से हर बात कह कर करवाना पड़ती है , जाना नहीं क्या अब तक आपने  ? “  लेकिन उन्होंने सिर्फ ये रजनीगंधा ही भेजा है . झगड़ा हुआ था क्या कल रात ? ये सफ़ेद झंडे से फूल भेजे है – मान्या बढ़बड़ाई .

दरअसल अंतरा को पसंद ही यही है , रजनीगंधा और मोगरे ! शुरू शुरू में जब वे घूम कर लौटते , कोने वाले फ्लोरिस्ट के यहाँ रुकते और वह , उन्हें देखते ही रजनीगंधा और मोगरे बांध देता .
सारे दिन बाद , अब अंतरा के चेहरे पर मुस्कराहट आई थी. 
“ ये मुस्कराहट किस लिए ? “ – मान्या उसे ध्यान से देख रही थी .
“ तुम्हारे शानदार गिफ्ट के लिए. और इस साफ़ किये ड्राइंग रूम के लिए . चलो इतना तो किया ! “
ओह ये ! शीना मासी आ रही है न , शाम को यहीं धूम करेंगे – मान्या ने कहा.

“ अच्छा ! “ – अंतरा को बाहर जा कर फॉर्मल डिनर करना ख़ास पसंद नहीं था. और शीना उसकी बचपन की सहेली थी , बिलकुल पुरानी  अंतरा की तरह .... मस्त , खुशदिल ! उसका आने से घर का महौल बदल जाया करता है.

भाभी...........!!!!! वो बड़ा वाला पानी का कंटेनर कहाँ है ? – किचन से उठा पटक की आवाजों के बीच से मान्या की आवाज़ आई.
वो क्यों चाहिये तुम्हें ? – अंतरा का माथा ठनका .
अरे बीस – पच्चीस लोगों के लिए पानी का इंतज़ाम पहले से कर के रख देना ठीक रहेगा .

बीस-पच्चीस लोग ? कौन बीस-पच्चीस लोग ? – अंतरा ने बौखला कर पूछा .
उफ़ भाभी , चिल ! यही आपकी सहेलियां श्रिया , वंदना , शिखा , शीना मासी और सबकी फ़ैमिली .
तुमने बुलाया ?- अंतरा एकदम नाराज़ दिख रही थी .
नहीं , वो सब खुद ही आ रही हैं !  – मान्या ने हाथ खड़े कर दिए. अंतरा की तो मुस्कराहट और होश, दोनों  उड़ गए थे. उसने परेशान हो कर चारों तरफ देखा -“ और ये घर ......ये घर !”
क्या घर ? - मान्या ने कमर पर हाथ रख , माथे पर बल डाल कर यहाँ-वहाँ देखा.
इतनी जल्दी ये घर कैसे ठीक होगा ? – अंतरा की आवाज़ से परेशानी साफ़ झलक रही थी. 
ठीक ही तो है ! – मान्या ने कहा.
मान्या ये तुम्हारी फ्रेंड्स की हॉस्टल रूम की पार्टी नहीं है . जो आ रहे है ,वो सभी घर के लोग है, पूरे घर में घूमेंगे.

ओ.के , अभी ठीक करती हूँ घर - मान्या ने हवा में हाथ हिलाए ,जैसे जादू से सब कुछ ठीक करने वाली हो . 
गंभीरता तो इस लड़की को छू तक नहीं गयी है. अंतरा ने कमर में पल्ला खोंसा और बिखरे सामान को हाथ लगाया ही था की मान्या की आवाज़ आई – “ अरे रे .. सारे  मैनीक्योर , हेयर स्टाइल और मेकअप का नाश पीटेंगी क्या ? मैं कर रही हूँ ना !
सारे घटनाक्रम से हैरान-परेशान , अंतरा वहीं धप से बैठ गयी.

मान्या ने तेजी से बिखरे सामान को बटोरना और अलमारियों में ठूँसना शुरू किया. जो सामान अलमारियों में नहीं जा पाया ,उसे पलंग के नीचे लात मार के भेजा गया. 
“इसे क्राइसिस –मैनेजमेंट कहते है भाभी , चिल ! “ – मान्या अभी भी मस्ती में थी.

घर की थोड़ी सूरत सुधरते ही , अंतरा को याद आया -“खाना !!! “ 
वो फिर झटके से उठ खड़ी हुई. “ मान्या हमें खाने का इंतज़ाम करना होगा !!
“ भाभी ,आपकी समास्याओं का अंत नहीं है. मैंने प्लान किया है न खाना भी. केक ,बर्गर और पाव-भाजी - ठीक आठ बजे , डिलीवर हो जायेगा . मैंने आर्डर कर दिया है. कोल्ड-ड्रिंक्स मैंने पहले ही फ्रीज में रख दिए हैं.
अंतरा ने उसे ऐसे देखा जैसे वो फारसी बोल रही हो 
मान्या , बर्गर, पाव-भाजी खाना नहीं होते .
“ हमारे लिए तो होते है “ – मान्या और कुहू ने सर खुजाया. वैसे शीना मासी वेज़ पुलाव ला रही है और वंदना आंटी नूडल्स. बस ,अब इससे ज़्यादा कोई कुछ खा भी नहीं सकता .

मान्या , मनु क्या कहेंगे ?
यही की , ये कोई डिनर है ? ना सब्जी , ना पूरी , न रायता , न सलाद ! चिल भाभी . एक दिन हम अपनी तरह भी तो खा सकते है न ? 
सच में , जब मनु टूर पर जाते है तो कभी कभी , अंतरा, कुहू और मान्या , स्ट्रीट फ़ूड ही तो एन्जॉय करते हैं. आँखों से आंसू निकाल देने वाले गोल-गप्पों के बाद ठंडी ठंडी सॉफ़्टी आइस क्रीम , और ऐसे ही कुछ-भी !  

मान्या कह रही थी – “ मैं भाई से कहूँगी , यह पार्टी मैंने प्लान की है . अब मुझसे और क्या आशा की जा सकती है ? है न ? अच्छा चलिये , तैयार हो जाइये , अब वक्त ही कहाँ है कुछ और सोचने या करने का ! 
अंतरा ने एक अच्छी सी साड़ी अपनी अलमारी से निकाली . 
“ ये पहनेगीं आप ? “ – मान्या जिन्न की तरह सामने प्रकट हुई. 
हाँ क्यों ? अच्छी नहीं है ?
“ बहुत अच्छी है “ – मान्या ने उसकी फुटबाल बनाते हुए कहा.
अरे फिर प्रेस करनी पड़ेगी ! – अंतरा ने साड़ी छीनने की नाकाम कोशिश की .
“ वो जो आपके पास जीन्स है , वो क्या सिर्फ पहाडों पर घूमने जाने के लिए है ? वो निकालिए .
और मनु क्या कहेंगे ? – कमर पर हाथ रखते हुए अंतरा ने कहा.
“ यही की , अच्छी लग रही हो ! “  - मान्या उसकी अलमारी की खुदाई मे लगी थी. एक कुर्ती निकाल कर थमाती हुई बोली. आखिर फर्क ही कितना है जीन्स और चूड़ीदार में . चलिए अब पहन भी लीजिये ना.
मान्या को तो आज कुछ मानना ही नहीं है , और इतने सारे लोग बस आते ही होंगे , बेहतर होगा मैं यही पहन कर तैयार तो हो जाऊँ – अंतरा ने सोचा और मान्या के हाथ से कपड़े ले लिए. 

धीरे – धीरे , सब आना शुरू हुए . घर के सहज महौल में , कुछ ज़मीन पर पैर पसरे बैठे थे , कुछ बाल्कनी में फुहारों का मज़ा ले रहे थे . खुलकर बातें हो रहीं थीं और बेरोकटोक कहकहे लगाये जा रहे थे . गनीमत की मान्या ने म्यूजिक अपनी पसंद का नहीं लगा रखा था , सो ज़लतरंग की आवाज़ बारिश की बूंदों के साथ सुंदर जुगलबंदी कर रही थी .
स्नैक्स में सर्व किये गए कुरकुरे , पोटैटो वेफर्स , बर्गर और कोल्डड्रिंक सभी को रास आते दिख रहे थे ,सिवाय मनु के .
अंतरा , मुझे कहा तो होता , कुछ ढंग का ले आता मैं – मनु ने सिर हिलाया .
मुझे पता होता , तब ना ? - अंतरा ने कहा .

कुहू मेहमानों को गेम्स खिलने में मगन थी . एक बंद संदूक में से उपहार निकलना था. चाबियाँ दर्ज़नों थीं और समय सिर्फ तीस सेकंड्स का .
परदे के पीछे खड़े इंसान को पहचानना था , सिर्फ उसकी नाक देखकर , जो परदे में कटे गोल छेद से बाहर निकाली जा रही थी .
अब पर्दा काट डाला !!!!!” -  अंतरा ने हैरान हो कर मान्या को घूरा .
हुँह ! पुराना हो गया था भाभी  – मान्या ने तेज़ी से दूसरी ओर सरकते हुए कहा .
जिस तरह से सारा घर हँसी-ख़ुशी से सज संवर गया था , एक परदे की बलि देना , उतना नागवार नहीं गुजरा अंतरा को. 
हर काम को सलीके से करने की आदि हो चली अंतरा को , कुछ देर तो पार्टी को ठीक से प्लान नहीं कर पाने का मलाल रहा , पर फिर उसने महसूस किया की घर की सजावट , खाने की टेबल का लुक और सावधानी से चुना मेनू , कोई भी नहीं मिस कर रहा.
शीना और वंदना के लाये पुलाव और नूडल्स , सभी शौक से खा रहे थे और तारीफें सुन सुन कर दोनों निहाल हुई जा रही थी. ऐसा ही तो होना चाहिए सेलिब्रेशन , जहाँ सब शामिल हों , दिल से ! घर का कोना-कोना खिलखिला रहा था. अब पूरा साल , इस दिन की यादें , यहाँ वहाँ से झांक कर मुस्कुरायेंगी. 
आज , कुछ देर के लिए अंतरा , फिर वही पुरानी अंतरा बन गयी थी. मस्त ...खुशदिल !
पार्टी ख़तम हुई. मान्या ने अंतरा से कहा – “ भाभी , अभी कुछ नहीं समेटना है , कल मैं सब ठीक कर दूँगी “
अंतरा मुस्कुरा पड़ी , पता है उसे .... मान्या कल दोपहर तक सो कर उठने वाली ही नहीं. और फिर मान्या का – “ ठीक कर देना” भी पता है उसे. वो अलमारियों में ठूँसा सामान जो याद आ गया था !
“ भाभी “ – मान्या ने उसके पास बैठते हुए कहा  , “ मुझसे आप और कोई आशा रखें या ना रखे , पर यह उम्मीद जरूर रख सकती है की मैं कभी भी , कुछ ऐसा नहीं करुँगी जो माँ के सामने आपको और भाई को शर्मिंदा कर दे . 
“ हमेशा उधम करने वाली मान्या , अभी बिलकुल गंभीर और शांत थी. अंतरा उसे देखती ही रह गयी. लगती है उथली नदी सी , उछल-कूद कर बहती हुई , लेकिन आज उसमें ठहराव और गहराई नज़र आई अंतरा को. मनु और अंतरा ने समय से पहले ही गंभीरता ओढ़ ली है , यह समझ रही थी वह . अगर मनु और अंतरा उसकी ज़िन्दगी बनाना चाहते हैं , तो उसे भी उनकी परवाह है , ऐसा आज मान्या ने अपने ही तरीके से कहने की कोशिश की थी. 
आज उपहार में उसने , अंतरा को ज़िन्दगी का एक टुकड़ा थमा दिया था. अगर सभी को एक दूसरे की परवाह हो तो ज़िन्दगी कितनी आसान , कितनी खुशनुमा हो सकती है !

मान्या , तुम बदलना मत कभी !  अंतरा ने खुद को कहते हुए सुना .
मुझे कहाँ आपकी समझाईशों का असर होता है ? – मान्या फिर पुराने रंग में आ चुकी थी. 
पर भाभी , आप कभी कभी बदल जाया कीजिये - मान्या ने कहा.
चलो सो जाओ अब , और ये कपडे बदल लो पहले – अंतरा ने कहा.
चिल भाभी !! कल बदल लूंगी ! -  मान्या की जम्हाई , अधबीच में , मुस्कराहट में तब्दील हो गयी थी.
तुम नहीं सुधरोगी ! – अंतरा हंस पड़ी.
“ ना , कभी नहीं “ – मान्या ने ऐतबार दिलाया . 
लेकिन अब अंतरा को भरोसा था की ऊपर से बेपरवाह नज़र आती मान्या , असल में है बहुत ही संवेदनशील . और ज़िम्मेदार भी . आखिर बहन किसकी है ! अंतरा का मन , अपने छोटे से परिवार के लिए गर्व से भर आया. 

कमरे में पहुँची तो मनु इंतज़ार ही कर रहे थे. 
“ अच्छी लग रही हो ! “ –उन्होंने कहा. अंतरा ने हैरानी से उन्हें देखा . ऐसे तारीफ़ करना मनु की फितरत नहीं , ये भी मान्या सिखा गयी क्या ? 
हाँ इतनी मोटी नहीं हुई हूँ  , ये ड्रेस ठीक ही लग रहा है “ – अंतरा ने खुद को आईने में देखते हुए कहा.
“ जब इतनी खुश होती हो , अच्छी लगती हो ! “ – मनु उसकी ड्रेस को नहीं , उसे देख रहे थे. 

अब मुझे ऐसे ही रहना है , अपने लिए , मनु कुहू के लिए और मान्या के लिए ........ अंतरा की गहरी मुस्कराहट ने इस फैसले पर मुहर लगा ली थी. जिंदगी को गंभीरता से लेने के लिए गंभीर हो जाना जरूरी नहीं है. अपने पैर बिस्तर पर समेटती हुए अंतरा ने मन में सोचा , “ कितना सुन्दर दिन था ....... चिल अंतरा ! “

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