My Sentiments Studio
Tell TalesKids

बाबाई टूबाई

जुड़वाँ भाई बाबाई और टूबाइ बिल्कुल एक जैसे दिखते हैं! माँ भी इन्हें पहचानने में धोखा खा जाती हैं। पर इन्हें पहचानने का एक पक्का तरीका है - इन्हें गुस्सा दिलाना! तब बाबाई कहता है "हाँ तो?" और टूबाइ "तो फिर?"। इन नन्हे शैतानों की यह मज़ेदार कहानी ज़रूर पढ़ें!

By Neelam Verma5 min read

बाबाई और टूबाइ , जुड़वाँ भाई हैं . सिर्फ़ चार साल के हैं वे और हुबहू एक से दिखते है. घुँघराले काले बाल , फूले हुए गुलाबी गाल , बटन जैसी छोटी सी नाक , शरारत से चमकती भूरी आँखें ! बाबाई , टूबाइ की माँ तक उन्हें पहचानने में चूक कर जातीं थीं . लेकिन एक चीज़ थी जिससे इन दोनों को अलग अलग पहचाना जा सकता था . एकदम फूलप्रूफ तरीक़ा था वो ! दोनों को ज़्यादा बोलना नहीं आता था पर बाबाई , टूबाइ ने एक एक वाक्य बोलना सीखा था , ना जाने कहाँ से ! बाबाई का मनपसंद वाक्य था - “ हाँ तो ? “ और टूबाइ हमेशा कहता पाया जाता - “ तो फिर ? “ कभी भी ऐसा नहीं होता की वे एक दूसरे का वाक्य बोलें . लेकिन इस तरीक़े से यह पता करने के लिए की बाबाई कौन और कौन टूबाइ है , उन्हें ग़ुस्सा दिलाना पड़ता . दोनों को जब ग़ुस्सा आ रहा होता तब वे अपनी कमर पर हाथ रख , माथे पर बल डाल कर बोलते - हाँ तो ? तो फिर ? ज़रूर उन्होंने किन्ही दो बड़े लोगों को ऐसे बहस करते सुना होगा . तो अब, जब भी उनके बीच कोई अनबन होती , वे आमने - सामने खड़े होकर शुरू हो जाते - हाँ तो ? - बाबाई कहता . तो फिर ? - टूबाइ भी ताव दिखाता . झगड़ा जितनी देर चलता , दोनों की आवाज़ें उतनी ही ऊँची होती जाती . और बोलते वे सिर्फ़ यही थे - हाँ तो ? तो फिर ? जब उनकी आवाज़ें कमरे से निकल कर बाहर आँगन में सुनाई पड़ने लगती , तो कोई बड़ा जाकर उन दोनों में सुलह करवा आता. नहीं तो दोनों की उँगलियाँ एक दूसरे के घुँघराले बालों में जा उलझतीं . और फिर दो बच्चों का एक साथ चीख कर रोना ? ओ माँ !!!! सारा घर हिल जाता था . ये “ हाँ तो “ और “ तो फिर” की जुगलबंदी कभी भी , कहीं भी शुरू हो सकती थी . एक बार माँ दोनों को साथ लेकर मॉल गयीं . वे अपनी कार्ट में समान रखती जा रही थीं और पीछे पीछे चल रहे बाबाई - टूबाइ पर भी नज़र रख रहीं थीं . थोड़ी देर बाद उन्होंने देखा बाबाई-टूबाइ के हाथों में भी ढेर सारा सामान आ गया है . बिस्किट- टॉफ़ी के पैकेट , कुछ और रंग- बिरंगे डिब्बे . उन्होंने दोनों के हाथों से सामान लेकर वापस शेल्फ में रख दिया और दोनों को सख़्त वॉर्निंग दी की अब कुछ ना उठायें . कुछ देर तक तो वे दोनों सीधे चले , फिर बाबाई को किशमिश का पैकेट नज़र आ गया . अब किशमिश तो बाबाई से छोड़ी ना गयी , उसने झट अपनी छोटी छोटी बाहों में एक पैकेट छुपा लिया . लेकिन टूबाइ के उसे ऐसा करते देख लिया था . अब जब माँ ने कहा है “ ना “ , तो ना ! वह बाबाई को ग़ुस्से से देखने लगा . बाबाई ने टूबाइ को भी ग़ुस्से से घूरा . “ हाँ तो ? “ - बाबाई ने कहा , जिसका मतलब था -मुझे तो चाहिए किशमिश ! “ तो फिर “ - टूबाइ ने कमर पर हाथ रखे और माथे पर बल डाल कर बोला. हाँ तो और तो फिर की तुकबंदी जब माँ के कानों में पड़ी तो वे लपकती हुई दोनों के पास आयीं . मामला थोड़ी देर में समझ आया और किशमिश का पैकेट वापस शेल्फ में धर दिया गया . घर वापस आने के बाद बाबाई-टूबाइ को दूध पीने को दिया गया . बाबाई को दूध पसंद था , वो झट से पी गया . टूबाइ को दूध ज़रा नहीं भाता . ऐसे में बाबाई , टूबाइ के हिस्से का भी दूध गटक जाता और मामला शांति से निपट जाता . लेकिन आज तो बाबाई ग़ुस्से में था . किशमिश का पैकेट छिन जाने का दुख गया नहीं था अभी . सो उसने टूबाइ की मदद करने से साफ़ मना कर दिया - “ हाँ तो ? “ . मतलब - क्या करूँ मैं , जो तुम्हें दूध नहीं पसंद तो ? टूबाइ ने रुआँसा होकर कहा - “ तो फिर ? “ . यानी - नहीं पियोगे क्या तुम ये दूध ? “ हाँ तो ?” - बाबाई ने ताव दिखाया . “तो फिर ? “ - टूबाइ को भी अब ग़ुस्सा आया . लड़ाई तो शुरू हो चुकी थी . हाँ तो और तो फिर की जुगलबंदी बाहर तक पहुँचने में देर नहीं लगी . आज तो बाबाई - टूबाइ का एक राज , माँ के सामने खुल गया था . टूबाइ को अब रोज़ दूध पीना पड़ेगा ,माँ के सामने ! रात के खाने में आज खिचड़ी मिली . अब ये तो दोनों को ही नहीं पसंद थी . बाबाई ने धीरे धीरे खिचड़ी टूबाइ की प्लेट में डालना शुरू की . अब अगर बाबाई ने टूबाइ के हिस्से का दूध चुपचाप पी लिया होता तो शायद टूबाइ उसकी खिचड़ी खा भी लेता . लेकिन आज तो झगड़ा चला ही आ रहा था. टूबाइ ने बाबाई को ग़ुस्से से देखा . बाबाई ने कमर पर हाथ रखे और बोला - “ हाँ तो ? ग़ुस्सा तो बाबाई की नाक पर ही रखा रहता था. तो फिर ? - टूबाइ ने भी कमर पर हाथ रखे और नाराज़गी से बोला . ज़रा सी देर में दोनों की आवाज़ें ऊँची , और ऊँची , और बहुत ऊँची हो गयीं. बाबाई - टूबाइ के पिताजी वहाँ आए और दोनों को अपनी गोद में बैठा लिया . अब क्या हुआ मेरे बेटों को ? - वे हँसे और दोनों के घुँघराले बालों में अपनी उँगलियाँ चलायीं . उन्होंने अपने हाथ से छोटे छोटे कौर बनाकर दोनों को खिचड़ी खिलाई और फिर मुँह धुलाकर पलंग पर लिटा दिया. एक नरम गुलगुला कम्बल उढ़ाया . बाबाई ने टूबाइ को देखा और टूबाइ ने बाबाई को . दोनों मुस्कुरा दिए . बाबाई ने अपनी बाहें टूबाइ पर रखी और टूबाइ ने अपने पैर बाबाई पर . हाँ तो ? - बाबाई ने उनिंदी आँखों से टूबाइ को देखा . तो फिर ? - टूबाइ ने जम्हायी लेकर कहा . जब माँ वहाँ आयीं , तो दोनों गहरी नींद में सो चुके थे .

Comments(0)

No comments yet — be the first.