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कनखजूरे के पाँव

बेचारे कनखजूरे की पूरी सौ टांगों में दर्द है! तितली, मेंढक और चींटियों की मदद से भी कोई फायदा नहीं हुआ। तभी एक लाल चिड़िया ने उसे अपनी चोंच में उठाने की पेशकश की! क्या कनखजूरा बनेगा चिड़िया का भोजन या उसे मिलेगा आराम? पढ़ें यह मज़ेदार कहानी।

By Neelam Verma5 min read

आज कनखजूरा बहुत चुप है . कुछ ज़्यादा ही सीधा बैठा है . नहीं तो ये कनखजूरा ?
हमेशा अपनी सौ टांगों को लहराता, अवारागर्दी करता घूमता मिलता था.
वहाँ एक सतरंगी तितली उड़ती हुई आयी और उसने कनखजूरे को यूँ पड़ा देखा .

अरे ओ कनखजूरेsssss - उसने आवाज़ लगाई . चलो भी , सुबह कब की हो ली .

आह्ह्ह्ह - कनखजूरे की दर्दभरी आवाज़ निकली.

अरे !! क्या हुआ दोस्त ? - तितली ने कनखजूरे के ऊपर गोल चक्कर लगाया .

मेरे पैर ....आह मेरे पैर ! कितना दर्द है इनमें - कनखजूरे ने कराहते हुए कहा .

तितली ने ध्यान से कनखजूरे के पैरों को देखा .
एक , दो , तीन , चार , पाँच ,छः ........ हे भगवान कितने सारे पैर है इसके ! पूरे सौ !!!!!
भाई कनखजूरे कौन से पैर में दर्द है ? - उसने पूछा .

अरे सभी दुख रहे रहे हैं ! - कनखजूरे ने बेचैनी से अपने पैर हिलाए .

अच्छा , मैं तुम्हारे पैर दबा देती हूँ - तितली ने कहा और वो कनखजूरे के पैरों पर चलने लगी .
थोड़ी देर तो ठीक रहा फिर कनखजूरा बोला - ओह ओह ओह तितली , तुम्हारे पैर तो बहुत खुरदुरे हैं !

हाँ - तितली ने कहा , मुझे इनसे फूलों का रस जो निकलना होता है .
इससे तो मेरे पैरों की तकलीफ़ बढ़ रही है - कनखजूरे ने कहा.
फिर तो मैं तुम्हारी मदद नहीं कर सकती - तितली ने कहा और उड़ गयी

पास ही हरियल मेंढक बैठा दोनों की बातें सुन रहा था
उसने कहा - सुनो ओ कनखजूरे , मेरे पैर बहुत ही चिकने हैं , लाओ में दबा दूँ तुम्हारे पैर .

हाँ ठीक है - कनखजूरे ने कहा .

मेंढक ने छलाँग मारी और सीधा कनखजूरे पर आ गिरा ! और फिर उसने कूद कूद कर उसके पाँव दबाना शुरू किए .
अरे अरे भई , रुको रुको , रुक जाओ - कनखजूरा चिल्लाया .
ज़रा धीरे धीरे दबाओ पैर .

ना - मेंढक बोला . मैं तो ऐसे ही चलता हूँ , कूद कूद कर .
तुम रहने ही दो भाई - कनखजूरा मिनमिनाया , तुम तो मेरी दस बीस टाँगे ही तोड़ दोगे.
कोई बात नहीं , मैं ये चला - मेंढक ने एक छलाँग लगाई और ग़ायब हो गया .

अब क्या करूँ मैं ? - कनखजूरा सोच ही रहा था की एक भँवरा गुन-गुन करता वहाँ आया .
सुनो भँवरे - कनखजूरे ने आवाज़ लगाई .
मगर भँवरा अपनी गुन गुन में मगन , वो भला कहाँ सुनता .
ओ भँवरे - कनखजूरा पूरी ताक़त लगाकर चिल्लाया .
अब भँवरे को सुन पड़ी और वो नीचे उतरा. उसने कनखजूरे की तकलीफ़ सुनी और उसके पाँव दबाने लगा .
सुनो भँवरे , क्या तुम थोड़ी देर गुन-गुन करना बंन्द करोगे ? मेरा तो अब सर भी दुखने लगा है.
अब भँवरा तो ठहरा भँवरा !
बिना गुन गुन किए मैं कुछ नहीं कर सकता - भँवरे ने कहा और गुनगुनाता उड़ गया .

कनखजूरा परेशान हाल बैठा था . तभी वहाँ से काली काली चींटियों की क़तार निकली. वे सब खाने की तलाश में निकली थीं . उन्होंने उसे देखा तो रुक कर पूछने लगीं - भाई , क्या तुमने कहीं मीठे फल देखे हैं ?

अरे, मैं चल ही कहाँ पा रहा हूँ , देखती नहीं हो कितनी तकलीफ़ में हूँ ?

तो पहले क्यूँ नहीं बताया ? अभी ठीक करते हैं तुम्हारे पाँव - चींटियों ने कहा और उसके पैरों पर क़तार बना कर चलने लगीं.
हा हा हा - कनखजूरा हँसा .
हा हा हा हा हा - अब उसने हिलना भी शुरू कर दिया क्यूँकि उसे चींटियों के हल्के हल्के पाँवों से गुदगुदी हो रही रही थी .
अरे अरे , हिलना बंद करो - चींटियों ने कहा , हम सब गिर जाएँगीं .
लेकिन कनखजूरे को तो हँसी का दौरा पड़ चुका था . वह इतना तेज हिला की कुछ चींटियाँ यहाँ गिरीं , कुछ वहाँ .

अभी तो कह रहे थे की टाँगे दुःख रहीं है और अब हँसी नहीं रुक रही - चींटियाँ बहुत नाराज़ हो गयी .
भलाई का तो ज़माना ही नहीं रहा - उन्होंने कहा.
हमारा खाना ढूँढने का वक्त है , अगर हम अभी खाना जमा नहीं करेंगे तो बारिशों में खाएँगे क्या ?
और तुम्हें मज़ाक़ सूझ रहा है ?

नहीं नहीं बहनों , मेरे पैर सच में दुःख रहे है - उसने कहा .
लेकिन चींटियों ने उसकी एक ना सुनी और वे फिर क़तार बनाकर चल पड़ी .

कनखजूरा सच में मुसीबत में था और उसकी समझ नहीं आ रहा था की अब वो क्या करे ?
ट्वीट ट्वीट ट्वीट . उसे कहीं से बड़ी मीठी आवाज़ आयी .
सर उठाकर देखा तो सुर्ख़ लाल रंग की नन्ही सी चिड़िया , पेड़ की शाख़ पर बैठी थी .
कनखजूरा डर गया .

आज तो में भाग कर कहीं छुप भी नहीं सकता ....आऽऽह मेरे पैर !!! अब तो चिड़िया ज़रूर मुझे खा जाएगी .

सुनो कीड़े - चिड़िया ने कहा .
मैं कनखजूरा हूँ - पीछे सरकते हुए उसने कहा .
चिड़िया ने चोंच से अपने लाल लाल रेशमी बाल सँवारे और इतरा कर कहा - तुम जो भी हो , तकलीफ़ में हो .
मदद चाहिए ?
तुम क्यूँ करोगी मेरी मदद भला , खा नहीं लोगी तुम मुझे ?
अरे नहीं , मैं बीमार कीड़ा नहीं खाती - चिड़िया फिर इतरायी .

अगर तुम मुझ पर विश्वास करो तो मैं तुम्हारी मदद कर सकती हूँ
पास ही एक गर्म पानी का सोता है , तुम्हें अपनी चोंच से उठाकर वहाँ ले चलती हूँ , वहाँ तुम ठीक हो जाओगे .

चोंच में ????? - कनखजूरा डर से कांप गया .
लेकिन वो भाग भी तो नहीं सकता था , तो उसने सोचा , मान कर देखता हूँ चिड़िया की बात .
चिड़िया ने बहुत धीरे से, सम्भाल कर उसे अपनी चोंच में उठाया , उड़ी और गर्म पानी के सोते में आधे डूबे पत्थर पर रख आयी.
गर्म पानी की सिंकायी से कनखजूरे के पूरे सौ पैरों का दर्द ग़ायब हो गया .

कनखजूरा मस्ती में गाना गाता हुआ वापस चला . रास्ते में उसने लाल चिड़िया , काली चींटियों, गुन-गुन भँवरे , हरियल मेंढक और सतरंगी तितली को बहुत बहुत धन्यवाद दिया . मुसीबत में काम आने वाले को कभी भूलना नहीं चाहिए उस प्यारे से कनखजूरे को मालूम था .

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