लिट्टी,पिट्टटी और सिट्टी
हलवाई की दुकान के पीछे रहने वाली कबरी बिल्ली की बच्ची 'पिट्टी' बेहद शैतान है! कभी चिमनी से रसमलाई चुराने का सीक्रेट प्लान, तो कभी मकड़ी के जाले में फँसना। क्या पिट्टी कभी अपनी शरारतों से बाज़ आएगी? पढ़िए इन तीन नटखट बिल्लियों की यह बेहद मज़ेदार कहानी!
एक मोटी , कबरी बिल्ली मिठाई की दुकान के पीछे रहती थी . हलवाई ने घी का एक बड़ा सा ख़ाली टीन फेंका था , कबरी बिल्ली ने उसी में घर बनाया था. हलवाई का कँधे पर डालने वाला गमछा , बिल्ली ने चुरा लिया था और टीन के अंदर बिछा रखा था . उस गमछे के नीचे बिल्ली , चुराई हुई मिठाई छुपा कर रखती थी. हलवाई ने गमछा गुमने के कारण वेटर का काम करने वाले छोटू के कान भी खींच डाले थे . कबरी बिल्ली के तीन बच्चे थे . लिट्टी , पिट्टी और सिट्टी . लिट्टी इतनी आलसी थी की लेटी ही रहती हर समय . पिट्टी इतनी शैतान की जब देखो उसकी पिटाई ही हो रही होती . और सिट्टी , आराम से बैठी सब कुछ देखती रहती. पिट्टी को हर समय ऊधम सूझता , सिट्टी उसका साथ देने को तैयार हो जाती और दोनों मिलकर लिट्टी को भी मना ही लेते . एक दिन पिट्टी को मिठाई की दुकान में घुसने का नया रास्ता मिल गया . मिठाइयाँ पकाने की जो बड़ी सी भट्टी थी , उसके ऊपर चिमनी लगी थी , धुआँ बाहर निकलने के लिए . रात को जब मिठाइयाँ बनना बंद हो जाती , तब चिमनी ठंडी हो जाती थी और उस चिमनी से सीधे, मिठाइयों तक पहुँच जा सकता था . प्लान तो बहुत शानदार था , सिट्टी मान भी गयी थी . अब बस लिट्टी को मनाना था. सुनो , आज हलवाई ने गोल गोल रसभरे गुलाबजामुन बनाए हैं - पिट्टी ने ज़ोर से सिट्टी को कहा . हाँ , और रसमलाई भी - सिट्टी ने लिट्टी को सुनते हुए कहा. लिट्टी के, जो अब तक लेटी हुई अपने पंजे चाट चाट कर साफ़ कर रही , कान खड़े हो गए . रात को जब सब सो जाएँगे , हम चिमनी के रास्ते मिठाइयों तक आसानी से पहुँच जाएँगे , जी भरकर रसमलाई खाएँगे - पिट्टी और सिट्टी आपस में तय कर रहे थे. लिट्टी ने कुछ कहा तो नहीं , पर मन तो उसने भी बना लिया था . अब रसमलाई का लालच कैसे ना होता ! रात को तीन झक सफ़ेद बिल्ली के बच्चे , अपने टीन के घर से निकले और दबे पाँव चिमनी तक पहुँचे . पिट्टी को तो तो कुछ सोचना समझना होता ही नहीं था , सो वो तो चिमनी में कूदी और सर्रररर्र …...अगले ही सेकंड मिठाइयों के सामने थी ! म्याऊँ म्याऊँ म्य्य्य्याऊऊ …… उसकी ख़ुशी भरी तान सुन कर सिट्टी , लिट्टी भी चिमनी में कूद पड़े .इतनी रसमलाई खाई तीनों ने की उनसे चलते भी नहीं बन रहा था . बड़ी देर तक तीनों वहीं पड़े रहे . जैसे ही सुबह दुकान खुली, वे किसी तरह लुढ़कते हुए बाहर निकले ,घर पहुँचे और सो गए. सूरज की पहली किरण जैसे ही कबरी के टीन के घर में पड़ी , हंगामा मच गया ! कबरी की नज़र तीन घुप काले जीवों पर पड़ी और उसकी डर के मारे चीख़ निकल गयी . ना जाने कौन से कटखन्ने जानवर हैं ये !!!! और यहाँ कैसे घुस आए ?? माँ की चीख़ सुनकर तीनों बच्चे उठ बैठे . जैसे ही उनकी नज़र एक दूसरे पर पड़ी , और भी बड़ा हंगामा मच गया . वे एक दूसरे को देखकर बुरी तरह डर गए और उन्होंने भी चीख़ना शुरू कर दिया . काले जीवों की आवाज़ सुनकर माँ ने उन्हें पहचान लिया . ओह ! ये तो लिट्टी , पिट्टी, सिट्टी हैं ! पर इन्हें हुआ क्या है ? - कबरी बिल्ली हैरान थी . “गए कहाँ थे तुम तीनों ?”- कबरी बिल्ली ने धमका कर पूछा . तब समझ आया की चिमनी की कालिख से तीनों बच्चे भूत की तरह काले हो गए थे . ये पूरा प्लान पिट्टी का था , तो पिटाई की शुरुआत पिट्टी से ही हुई . लिट्टी और सिट्टी के भी कान मरोड़े माँ ने . इतनी ज़ोर से रगड़ कर नहलाया गया की तीनों बच्चों का हाल बेहाल हो गया. लिट्टी ने ग़ुस्से से पिट्टी और सिट्टी को घूरते हुए कहा - तुम दोनों की बात मान लेना ही बेवक़ूफ़ी है. इतने आराम से लेटी थी मैं . ख़ामख़ा तुम लोगों की बातों में आ गयी . पिट्टी ने उसकी बात सुनी , दुम फटकारी और चलती बनी . थोड़ी देर बाद जब वह लौटी तो उनके पास एक लाल रिबन था . पिट्टी ने उस रिबन से खेलना शुरू किया . बड़ा ही मज़ेदार खेल था , कभी रिबन हवा में उड़ता कभी उसके मुँह पर गिर जाता . लेकिन थोड़ी देर में ना जाने क्या हुआ , पिट्टी के चारों पैर उस रिबन में उलझ गए और वो धड़ाम से गिरी. उसके बाद तो पिट्टी जितने भी पैर चलाती उतनी ही रिबन में उलझती जाती . अब पिट्टी एक बंडल की तरह पड़ी थी और मदद के लिए चिल्लाये जा रही थी . लिट्टी , लेटी ही रही और सिट्टी बैठी देखती ही रही , दोनों की हँसी रोके नहीं रुकी . कबरी बिल्ली अंदर आयी और सीधे पिट्टी की पिटाई शुरू कर दी , हमेशा की तरह ! रिबन उसके बाद निकाला. क्यों तुम इतना ऊधम करती हो पिट्टी ? - कबरी ने अपना सर पीटा . ठीक है , अब मैं हिलने तक नहीं वाली , चाहे कुछ भी हो जाए ! - पिट्टी ने क़सम खायी. पिट्टी सच में टीन के एक कोने में चारों पंजे समेट कर बैठ गयी और अपनी झबरी दुम से अपनी आँखें ढक लीं . कबरी, लिट्टी और सिट्टी ने कहा - ओह ! ड्रामा क्वीन !!! पिट्टी सच में बहुत , बहुत देर ऐसे ही बैठी रही . उसे पता ही नहीं चला की कब टीन में छुप कर रहने वाली एक मकड़ी ने अपना जाल बनाना शुरू कर दिया था . उस मकड़ी की आँखें तो थी इत्ति बड़ी बड़ी , लेकिन उसे पिट्टी एक नर्म , गुलगुला बिछौना लगी . अब पिट्टी सोयी भी तो थी ऐसी गोल गोल ! मकड़ी ख़ुशी ख़ुशी गुनगुनाते हुए ,पिट्टी के सब तरफ़ अपना जाल बुनती गयी . जाले की बुनाई ख़त्म करते हुए वो पिट्टी की आँखों के ठीक सामने आ गयी . पिट्टी को बड़ी देर से सुरसुराहट मालूम हो तो रही थी , पर उसने क़सम जो खा रखी थी चुपचाप बैठे रहने की ! सो वह हिली तक नहीं .पिट्टी को जब अपनी मूँछों में गुदगुदी लगी तो उसकी आँखें खुल गयीं . अब मकड़ी की बड़ी बड़ी आँखें और उससे भी बड़ी पिट्टी की आँखें , एक दूसरे को घूर रही थीं ! कुछ सेकंड्ज़ के सन्नाटे के बाद , पिट्टी की डरी हुई , टीन - फाड़ आवाज़ गूंजी ! मियाआऊऊऊऊऊऊ …….. मकड़ी को हार्ट अटैक आते आते बचा . वो जान बचा कर भागी . लेकिन वो जाती कहाँ ? पूरा जाल ही पिट्टी के सब तरफ़ बना डाला था , सो वो पिट्टी के घने बालों में जा गिरी . मकड़ी बाहर निकलने के लिए जितनी तेज़ी से पाँव चलाती , पिट्टी को उतनी ही गुदगुदी होती और घबराहट भी ! कबरी, लिट्टी और सिट्टी बाहर खड़ी देख रही थीं , टीन बहुत तेज आवाज़ करता हुआ लुढ़क रहा था . कभी इधर , कभी उधर ! और पिट्टी की चीख़ने की आवाज़ें बढ़ती ही जा रही थीं . अब तो कबरी का भेजा एकदम फ़्राई हो गया . “ हद्द कर दी इसने ! आज तो मैंने इस पिट्टी का मार मार के भुर्ता ही बना देना है “ - कबरी चिल्लाई और लपकती हुई टीन के पास पहुँची . ग़ुस्से से पिट्टी को खींच कर बाहर निकाला . पिट्टी के टीन से बाहर आते ही , वो बड़ी बड़ी आँखों वाला मकोड़ा पिट्टी के सर से कूदा और भाग निकला ! ओह ओह !! कबरी भी घबरा कर पीछे हट गयी . आख़िर थोड़ी देर बाद सारी अफ़रा-तफ़री बंद हुई और कबरी ने पिट्टी को अपने पास छुपा लिया. आज पहली बार पिट्टी की पिटाई नहीं हुई . अब लिट्टी , सिट्टी और कबरी के बीच में घुसी बैठी पिट्टी , लॉलीपॉप चाट रही है . ये लॉलीपॉप , लिट्टी को मिठाई की दुकान के बाहर पड़ी मिली थी . मारे लाड़ के लिट्टी ने वो पिट्टी को दे दी है , पूरी की पूरी ! फ़िलहाल तो टीन के अंदर सुकून है . सब के सब आँखें बंद किये हुए पर्र पर्र कर रहे हैं . कबरी सोच रही है की अब पिट्टी सुधर जाएगी और सब ठीक हो जाएगा . …….और तुम्हें क्या लगता है ? हाँssssss !!!!! बिलकुल ठीक सोचा है तुमने ! पिट्टी आँखें बंद किये हुए , काला - खट्टा लॉलीपॉप चूसते हुए सोच रही है की अगली बार इस लॉलीपॉप को दुकान से कैसे तड़ीपार करना है ! कमाल के ख़ुराफ़ाती प्लान बन रहे हैं उसके दिमाग़ में …... हा हा हा हा …………
