मोर की आँखें
जब एक ज़िद्दी नन्हे खरगोश ने सोने से मना कर दिया, तो परेशान माँ ने उसे एक मोर के पास छोड़ दिया! अब बेचारा मोर इस शैतान को कैसे सुलाएगा? मोर की कमाल की तरकीब और पंखों वाली 'आँखों' का यह मज़ेदार किस्सा आपको ज़रूर मुस्कुराने पर मजबूर कर देगा।
मोर की आँखें जंगल में आज मंगल है . सब कुछ ठीक-ठाक है , चारों ओर सुकून फैला है. हिरनों के झुंड हरी हरी घास खा रहे हैं . नीलगाय ने घास ज़्यादा खा ली है , इसलिए अब वो बरगद के पेड़ के नीचे पड़ी जुगाली कर रही है . दो शैतान बंदर , ऊपर , बरगद की डंगाल पर उल्टे लटके उसकी नक़ल उतार रहे हैं . एक बंदर नीलगाय की तरह मुँह चला रहा है और दूसरा, दाँत निकाल कर हँसे जा रहा है ….खी खी खी खी …. . एक मोटा-ताज़ा अजगर , आधा पानी में और आधा ज़मीन पर पसरा पड़ा है . पता है ना , अजगर से ज़्यादा आलसी कोई और होता ही नहीं है ? इसलिए वो भाग- दौड़ तो करेगा नहीं . “ अगर कोई जानवर मेरे पास गलती से आ जाए , तो उसे अपनी दुम में कस लूँ और खा जाऊँ “ - यही सोच रहा है . कुछ टिड्डे हैं जो पेड़ों पर बैठे हैं लेकिन दिख नहीं रहे हैं क्योंकि वो सब पेड़ की पत्तियों जैसे हरे रंग के है . सिर्फ़ उनकी आवाज़ें आ रहीं हैं - किरकिट किरकिट किरकिट……… एक कठफोड़वा है , बड़ा ही मेहनती . किसी ने उसे कभी सोते तो देखा ही नहीं ! हर समय , अपनी मज़बूत चोंच से पेड़ों के तने में गड्ढे कर रहा होता . सारा जंगल उसकी , ठक ठक ठक ठक की आवाज़ से गूँजता रहता है . अपने बनाए गड्ढों में वह खुद रहता है .जब कभी कोई छोटी चिड़िया उसके गड्ढे में सो जाती , तो वो ज़रा भी बुरा नहीं मानता और एक नया गड्ढा खुद में लिए बना लेता. पूरे जंगल में अगर कोई भाग-दौड़ करने वाला है , तो वो हैं गिलहरियाँ ! पल में यहाँ, पल में वहाँ ! वे सब फलों के बीज़ इकट्ठा करने में लगी हैं . कुछ फल वे खा लेंगी , कुछ यूँ ही कुतर कर फेंक देंगी और बहुत सारे फल वो ज़मीन में छुपा कर भूल जायेंगी . बारिशों में यही छुपे हुए फल नए पेड़ बन कर उग आएँगे . देखा ? कैसे गिलहरियाँ जंगल में नए पेड़ लगा देती हैं ! फूलों से लदी झाड़ी पर एक नन्ही सी चिड़िया आराम कर रही है . जब हवायें झाड़ी को ज़ोर से हिला देती हैं , तो चिड़िया ख़ुशी से गा उठती है - चिक चिक चिक चिक पींsssssssss ! इन सबको को अपनी बड़ी बड़ी आँखों से देखते, बारहसिंघे इधर उधर घूम रहे हैं . वे एक बहुत ज़रूरी काम कर रहे हैं . जंगल के राजा शेर पर नज़र रखने का काम ! जब शेर सो कर उठता और शिकार को निकलता , बारहसिंघे तेज़ी से दौड़ दौड़ कर आवाज़ लगाकर सबको सावधान करते हैं . आज शेर एक बड़े से पत्थर पर हाथ पैर पसार कर सोया है . उसका सर एक तरफ़ लुढ़का पड़ा है और पूँछ , दूसरी तरफ़ . लगता है उसने कोई बहुत बड़ा जानवर खाया है . पेट एकदम भरा हुआ है और उसका शिकार करने का कोई इरादा नहीं है . इसीलिए, आज जंगल में मंगल है ….. सुकून छाया है चारों ओर ! इस शांति और सुकून भरे जंगल में एक ही जानवर है जो बिलकुल खुश नहीं है ! एक छुटका-मुटका ,नर्म गुलगुला लम्बे गुलाबी कानों वाला ख़रगोश का बच्चा . उसकी माँ चाहती है की वो सो जाए . लेकिन उसे तो माँ के साथ बाहर जाने की ज़िद्द चढ़ी है . जंगल उसे बड़ी ही अनोखी जगह लगती है . कितने तरह के फल , फूल , तितलियाँ , पानी के छोटे छोटे झरने और उनमें तैरती मछलियाँ ! मछलियों को देखना कितना अच्छा लगता है . जब बहुत देर समझाने पर भी बच्चा ख़रगोश नहीं माना तो माँ ख़रगोश ने ग़ुस्से में आकर उसके कान मरोड़ दिए . छुटका ख़रगोश बड़ी ज़ोर चिल्लाया . पास ही एक मोर सो रहा था , वह चौंक कर उठ बैठा . “ अरे क्यूँ मार रही हो बच्चे को ? “ - मोर ने नाराज़गी दिखाई . माँ ख़रगोश बोली - “ अच्छा तो तुम ही सम्भाल लो ना इसे थोड़ी देर . मैं खाना दूँढने जा रही हूँ “ और माँ ख़रगोश छलाँग लगाकर ग़ायब हो गयी. ये क्या मुसीबत आन पड़ी ! - मोर ने सोचा . पर अब तो बच्चे को देखना ही पड़ेगा . आओ हम पेड़ के चारों तरफ़ दौड़ लगाते हैं - मोर ने कहा. आगे आगे मोर भागा पीछे पीछे बच्चा . थोड़ी देर में मोर थक गया . अब आगे आगे बच्चा था और हाँफता हुआ मोर पीछे पीछे . थोड़ी देर में मोर धम्म से बैठ गया . “ और दौड़ो ना ! “ - बच्चे ने अपने नन्हें नन्हें पैर पटके और झबरिली, फुलफुलि दुम हिलायी . मोर ने सोचा उफ़्फ़्फ क्या करूँ अब मैं ? मैं तो इसे थकाना चाह रहा था . फिर उसे एक तरकीब सूझी ! “ सुनो बच्चे , क्या तुम मेरी आँखें गिन सकते हो ? “ - मोर ने कहा . “ हाँ . दो हैं ! “ - बच्चा ख़रगोश ने उसे घूरते हुए कहा . “ और अब ? “ - मोर ने अपने पूरे पंख फैला कर कहा . बच्चा ख़रगोश हैरान रह गया , उसका मुँह खुला का खुला रह गया ! “ कितनी सारी आँखें !!!! “ - उसने पहली बार किसी मोर के फैले हुए पर देखे थे . तो चलो , अब गिनना शुरू करो - मोर ने कहा एक , दो , तीन ……. आठ , नौ … उफ़्फ़ो में तो भूल गया कौन सी वाली गिन लीं हैं - बच्चा ख़रगोश बोला . कोई बात नहीं , फिर से शुरू कर लो - मोर मुस्कुराया . बच्चा ख़रगोश बार बार गिनता और हर बार कुछ ना कुछ गड़बड़ हो जाती . “ मुझसे नहीं होगा “ - उसने मोर से कहा . अच्छा ऐसा करो , मेरी पीठ पर आराम से लेट जाओ और फिर गिनो . एक बार और कोशिश करो- मोर ने कहा. ठीक है - बच्चे ने कहा और मोर की पीठ पर लेट गया. वाह , कितना अच्छा लग रहा है - बच्चा बोला . वह बहुत थक गया था मोर के चारों ओर घूम घूम कर गिनती करते हुए . एक , दो , तीन …… अभी गिनती बीस तक पहुँची थी . “मोर मामाsssss “ - बच्चे ने आवाज़ दी , “ मैं भूल गया हूँ की बीस के बाद क्या आता है “ “कोई बात नहीं , अपनी आँखें बंद करके सोचो ज़रा “ - मोर ने अपनी अगली चाल चली . अच्छा - बच्चा बोला और आँखें बंद करके सोचने लगा . बस फिर क्या था , थका हुआ बच्चा आँखें बंद करके, आगे की गिनती याद करते करते सो गया . यही तो मोर चाहता था ! उसने भी अपनी सारी आँखें बंद की और वो भी सो गया ।
